
अक्षराज को एक पल के लिए ऐसा लगा कि उसकी सांसे ही रुक गई हो। उसने अपने हाथ जल्दी से धृति के हाथ पर रख दिए जो उसके जिप के पास थे अभी भी।
"धृति? क्या कर रही हो?" अक्षराज ने अपने निचे देखते हुए कहा, जहां धृति तो दिख नहीं रही थी पर उसकी प्रजेंस को वो महसुस कर पा रहा था।



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