
अक्षराज़ की नजर बिस्तर पर बैठी सीमा जी और धृति के ऊपर जम गई थी। बो आज सीमा जी को सालों बाद अपने कमरे में देख रहा था।
वही सीमा जी ने जैसे ही अपने सामने अक्षराज़ को देखा, उन्होंने एक छोटी सी स्माइल धृति को पास की और कहा, 'हम तुम्हारे लिए गाजर का हलवा भिजवा रहे हैं, खा लेना उसे।"



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