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Ch 44-Her periods, His care

अक्षराज़ की नजर बिस्तर पर बैठी सीमा जी और धृति के ऊपर जम गई थी। बो आज सीमा जी को सालों बाद अपने कमरे में देख रहा था।

वही सीमा जी ने जैसे ही अपने सामने अक्षराज़ को देखा, उन्होंने एक छोटी सी स्माइल धृति को पास की और कहा, 'हम तुम्हारे लिए गाजर का हलवा भिजवा रहे हैं, खा लेना उसे।"

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