
एक दूसरे के होठों को मेहसूस करते ही एक अजीब सी सनसनी दोनों के ही अंदर फेल हो गई, धृति के हाथ अक्षराज की शर्ट पर कश गए वहीं अक्षराज ने अपनी पकड़ धृति की कमर पर मजबूत कर दी।
अक्षराज़ के होठों पर धृति के होठों को शिद्दत से चूम रहे थे, दोनों ही अपने एहसास में इतना खो गए थे कि उन्हें दुनिया की कोई खबर नहीं थी।



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