
धृति को खाता देख, आखिरकार उसे अब सुकून मिल रहा था। अगर वो वापस अपनी फैक्ट्री की फाइल नहीं लेता तो धृति बिना खाए रह जाती है।
ये सोचने भर से उसकी आँखों में गुस्सा उतर चुका था। उसे पता नहीं था कि ये कौन से emotions हैं जो उसे बार-बार धृति की तरफ खींच रहे हैं, लेकिन जो भी हो उसे सुकुन महसुस होता था धृति के पास।



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