
सुबह का वक्त,
अपने सीने पर कुछ अजीब मेहसूस करते ही अक्षराज ने अपनी आखे खोल दी। उसने अपना सिर घुमा कर देखा तो उसकी नज़र धृति के छोटे से चेहरे पर गई जो लगबग उसके सीने से लगा था। उसकी गरम सांसे अक्षराज को साफ साफ महसूस हो रही थी।

सुबह का वक्त,
अपने सीने पर कुछ अजीब मेहसूस करते ही अक्षराज ने अपनी आखे खोल दी। उसने अपना सिर घुमा कर देखा तो उसकी नज़र धृति के छोटे से चेहरे पर गई जो लगबग उसके सीने से लगा था। उसकी गरम सांसे अक्षराज को साफ साफ महसूस हो रही थी।
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